कर्म से कोई भी ब्राह्मण बन सकता है यह भी उतना ही सत्य हे.इसके कई प्रमाण वेदों और ग्रंथोमें मिलते हे जेसे…..
(1) ऐतरेय ऋषि दास अथवा अपराधी के पुत्र थे| परन्तु उच्च कोटि के ब्राह्मण बने और
(2) उन्होंने ऐतरेय ब्राह्मण और ऐतरेय उपनिषद की रचना की| ऋग्वेद को समझने के लिए ऐतरेय ब्राह्मण अतिशय आवश्यक माना जाता है|
(3) ऐलूष ऋषि दासी पुत्र थे | जुआरी और चरित्र हीन भी थे | परन्तु बाद में उन्होंने अध्ययन किया और ऋग्वेद पर अनुसन्धान करके अनेक अविष्कार किये|ऋषियों ने उन्हें आमंत्रित कर के आचार्य पद पर आसीन किया | (ऐतरेय ब्राह्मण२.१९)
(4) सत्यकाम जाबाल गणिका (वेश्या) के पुत्र थे परन्तु वे ब्राह्मणत्व को प्राप्त हुए |
(5) राजा दक्ष के पुत्र पृषध तपस्या करके उन्होंने मोक्ष प्राप्त किया | (विष्णु पुराण ४.१.१४)
(6) राजा नेदिष्ट के पुत्र नाभाग वैश्य हुए|पुनः इनके कई पुत्रों ने क्षत्रिय वर्ण अपनाया |
(विष्णु पुराण ४.१.१३)
(7) धृष्ट नाभाग के पुत्र थे परन्तु ब्राह्मण हुए और उनके पुत्र ने क्षत्रिय वर्ण अपनाया | (विष्णु पुराण ४.२.२)
(8) आगे उन्हींके वंश में पुनः कुछ ब्राह्मण हुए|(विष्णु पुराण ४.२.२)
(9) भागवत के अनुसार राजपुत्र अग्निवेश्य ब्राह्मण हुए |
(10) विष्णुपुराण और भागवत के अनुसार रथोतर क्षत्रिय से ब्राह्मण बने |
(11) हारित क्षत्रियपुत्र से ब्राह्मणहुए | (विष्णु पुराण ४.३.५)
(12) क्षत्रियकुल में जन्में शौनक ने ब्राह्मणत्व प्राप्त किया | (विष्णु पुराण ४.८.१)
वायु, विष्णु और हरिवंश पुराण कहते हैं कि शौनक ऋषि के पुत्र कर्म भेद से ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र वर्ण के हुए| इसी प्रकार गृत्समद, गृत्समति और वीतहव्य के उदाहरण हैं |
(13) मातंग चांडालपुत्र से ब्राह्मण बने |
(14) ऋषि पुलस्त्य का पौत्र रावण अपने कर्मों से राक्षस बना |
(15) राजा रघु का पुत्र प्रवृद्ध राक्षस हुआ |
(16) त्रिशंकु राजा होते हुए भी कर्मों से चांडाल बन गए थे |
(13) मातंग चांडालपुत्र से ब्राह्मण बने |
(14) ऋषि पुलस्त्य का पौत्र रावण अपने कर्मों से राक्षस बना |
(15) राजा रघु का पुत्र प्रवृद्ध राक्षस हुआ |
(16) त्रिशंकु राजा होते हुए भी कर्मों से चांडाल बन गए थे |
to be continued by Archna Raj