Tuesday, 26 September 2017

12-Oh ! My God The Reality Hidden Casteism -A Blot or Curse Imposed

जो महर्षि मनु के अनुसार
 विधाता शासिता वक्ता मो ब्राह्मण उच्यते। 
तस्मै नाकुशलं ब्रूयान्न शुष्कां गिरमीरयेत्॥ अर्थात-शास्त्रो का रचयिता तथा सत्कर्मों का अनुष्ठान करने वालाशिष्यादि की ताडनकर्ता,वेदादि का वक्ता और सर्व प्राणियों की हितकामना करने वाला ब्राह्मण कहलाता है। 
अतउसके लिए गाली-गलौज या डाँट-डपट के शब्दों का प्रयोग उचित नहीं” (मनु; 11-35) - -महर्षि याज्ञवल्क्य  पराशर  वशिष्ठ के अनुसार
 “जो निष्कारण (कुछ भी मिले एसी आसक्ति का त्याग कर के).
वेदों के अध्ययन में व्यस्त हे और वैदिक विचार संरक्षण और संवर्धन हेतु सक्रीय हे 
वही ब्राह्मण हे.” (सन्दर्भ ग्रन्थ – शतपथ ब्राह्मणऋग्वेद मंडल १०पराशर स्मृति) –

भगवद गीता में श्री कृष्ण के अनुसार
 “शमदमकरुणाप्रेमशील (चारित्र्यवान),निस्पृही जेसे गुणों का स्वामी ही ब्राह्मण हे” 
और 
चातुर्वर्ण्य माय सृष्टं गुण कर्म विभागशः” (.गी-१३)
इसमे गुण कर्म ही क्यों कहा भगवान ने जन्म क्यों नहीं कहा? -

जगद्गुरु शंकराचार्य के अनुसार “ब्राह्मण वही हे जो “पुंस्त्व” से युक्त हे.जो “मुमुक्षु” हेजिसका मुख्य ध्येय वैदिक विचारों का संवर्धन हे
जो सरल हेजो नीतिवान हेवेदों पर प्रेम रखता हे
जो तेजस्वी हे,ज्ञानी हेजिसका मुख्य व्यवसाय वेदो का अध्ययन और अध्यापन कार्य हे,
वेदों/उपनिषदों/दर्शन शास्त्रों का संवर्धन करने वाला ही ब्राह्मण हे”(सन्दर्भ ग्रन्थ –
 शंकराचार्य विरचित विवेक चूडामणिसर्व वेदांत सिद्धांत सार संग्रह,आत्माअनात्मा विवेककिन्तु जितना सत्य यह हे की केवल जन्म से ब्राह्मण होना संभव नहीं हे


ArchnaRaj

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